रात अकेली है…..


रात की चुप्पी की बात ही कुछ और होती है वो बीते हुए पल वो अधूरी बातें वो होटोन तक कर रुके हुए अल्फ़ाज़ वो दिल का तेज़ी से धड़कना किसी का इंतेज़ार करना मायूस होना ख़ुशी से नाचना किसी की मुस्कुराहट देख कर मुस्कुराना वो एक संदेश का इंतेज़ार करना


किसी से बात करने के इंतेज़ार में नींद का उद्द जाना किसी के चले जाने पे रोना किसी को याद करना किसी को बेनतहाम प्यार करके भी खो देना यह सब याद दिला जाती है| आज फिर सम्भालना है खुद को मनाना है अपने दुखते हुए दिल को समझना है उसको - कोई ना रुका है, ना ही कोई रुकेगा तुम्हारे साथ। संभल जाओ और हो सके तो सब भूल जाओ। वो बीते हुए लम्हे फिर कभी वापस नहीं आएँगे।

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